Thursday, July 26, 2012

तुम्हारी याद का सामां



पुराने वक्त की यादें 
तमाम इस गर्द के पीछे  
किसी अंधेरे कोने में 
या किसी ताख के नीचे



पड़ी मिलतीं हैं यूँ अक्सर 
कि जैसे उस पुराने शहर की
मानूस गलियों से 
गुज़रते वक्त 
ठोकर 
लग ही जाती है 




जहाँ बिखरा पड़ा है 
आज भी इतना  
तुम्हारी याद का सामां 
तुम्हारे लम्स के साये! 



Saturday, July 21, 2012

In Goa, a bowl of rice

In Goa
outside a temple
some flowers
are waiting for
the Lord...

I care, though,
more
for someone
to bridge that gap,
cause when 
the Lord will have
his fragrance
of choice,
I will have 
a bowl of rice.

Sunday, July 8, 2012

पहाड़ों पर कभी जब टूट कर बरसात होती है....

पहाड़ों पर कभी जब 
टूट कर 
बरसात होती है 


तो पहले बादल घिर आते हैं 
दिन में रात करते हैं 


कहीं झरने उमड़ पड़ते हैं 

कुछ रस्ते नहीं दिखते 

हर इक पत्ता निखर जाता है 
धुल जाता है बारिश में। 


ये सारे सिलसिले तो कैद हैं 
इस कैमरे में 
आज भी 
शोना  
मगर किस पर खुले ये राज़ 
के हर भीगे मौसम में 
मुझे तुम याद आती हो 
वोही दिन याद आता है 
कि जब हम भीगते लौटे थे घर 
और मेरी गाड़ी पर 
मुझे चूमा था 
पहली बार जब तुमने। 

कभी हिचकी बहुत आये तो 
बस इतना समझ लेना 
के फिर से हाथ छू आये 
तेरे लबों के निशां कांधे पर! 
July 8, 2012