Say Cheese :)
Wednesday, March 19, 2025
बंगाल की मैं शाम-ओ-सहर देख रहा हूँ
देखा नहीं जाता है मगर देख रहा हूँ
रहमत का चमकने को है फिर नैयिर-ए-ताबां
होने को है इस शब की सहर देख रहा हूँ
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