Tuesday, September 21, 2010

5. थामे रहना युँही

थामे रहना
युँही सबको
कि कोई
वक्त की धार मे
ना बह जाये
कि अगर छूट गये
हाथ कभी
तो क्या खबर
कि इन सायों के
निशां भी ना मिलें!

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