Wednesday, August 26, 2020

Fire extinguished

बुझ गयी आग इस तरह आखिर 
जैसे वो थी नहीं कभी मेरी  

 

Friday, August 21, 2020

Saturday, August 15, 2020

Nature is also waving our flag


स्वतंत्रता दिवस की अनन्त शुभकामनायें 

Wednesday, August 12, 2020

ललना जसुदा के ...


हाथी घोड़ा पालकी 
जय कन्हैया लाल की 
खीर खायें कंद की 
दुहाई बाबा नन्द की 
मदन गोपाल की 
जय कन्हैया लाल की 

Saturday, August 1, 2020

अब ऐसा भी नहीं होगा


जी भर के रो चुकी हो तुम 
या और भी अभी 
मेरी फुरक़त के 
अश्क़ बाकी हैं ?

उतरा है तैश या
कि रक़ीबों से 
रश्क़ बाकी हैं ?

जी भर के 
रो चुकी हो तुम 
तो सुन लो 
अब के मैं 
पास आने के ख्वाब 
छोड़ चुका,
दूर जाने के 
लिए निकला हूँ !

ज़िन्दगी से नहीं 
बनती मेरी 
मर्ग पाने के 
लिए निकला हूँ !

Tuesday, July 28, 2020

धुंधला पड़ गया सूरज


कोई चमका था
मेरे आसमान में
सूरज की तरह,
भर गया था
ज़िन्दगी को
हरारत से
रौशनी से
और अपने
धनक के
रंगो से !
हर सूरज की
एक उम्र
होती है
शायद
बहुत ही जल्द
इस बार
धुंधला
पड़ गया सूरज !

Sunday, July 26, 2020

May you always find teddy bears in clouds



यूँ ही छोटे छोटे पग से
डगमग डगमग चलना सीखो
अपने दम पर अपने पैरों
गिरना सीखो उठना सीखो

और जब उठना सीख चुको तो
औरों को भी बल देना तुम
इस दुनिया की बहुत समस्या
में से कुछ का हल देना तुम

और हल देते - देते तुमको
भोला दीखे हालाहल में
मन में कुछ कल्मष न आये
भालू देखो तुम बादल में


Tuesday, July 14, 2020

Jelly is not a Fish


समन्दर के अंदर
तो हम भी 
गए हैं 

मगर तुम वहां 
इतनी चुभती 
नहीं थीं।  

Monday, July 6, 2020

Tis the season to miss


तेरे बगैर मुझे चैन कैसे पड़ता है 
मेरे बगैर तुझे नींद कैसे आती है  
(जॉन एलिया)

गोमती पर भटकती है बारिश 
मेरी उदास दशहरी मुझे बुलाती है 
(गुस्ताख़ी मुआफ़)

Thursday, July 2, 2020

एक डिब्बा कहीं बिना ढक्कन


एक डिब्बा था कहीं 
रख के जिसे 
भूल गया हूँ 

एक डिब्बा 
कहीं
बिना ढक्कन 

साथ मिल जाएँ 
अगर दोनों तो 
मज़ा देखो 

हौले से चढ़ती 
मय का फिर 
नशा देखो

...



Monday, June 29, 2020

पहाड़ जैसे पहाड़


चलो 
चढ़ जाएँ 
पहाड़ों पर 
जहाँ से 
पहाड़ 
दिखते हैं 
अपनी पहुँच में, 
पहाड़ जैसे नहीं।  

Thursday, June 25, 2020

45 years ago today

On the night of 25 June 1975
Indira Gandhi suspended the Indian constitution
by implemented emergency
and hung out India's democracy
and it's people
just like this

Saturday, June 13, 2020

Tuesday, June 9, 2020

Somehow just reach

When you took that talk by the strategy prof too seriously
and fell for entrepreneurship 
but now just want to reach somehow 
The:

Sunday, May 3, 2020

सन्नाटा कब तक


निर्जन नव-पथ 
कब तक नाविक 
कब तक सूने द्वार, दिवस सब 
कब तक देख 
दीवारें काटें 
सूने-सूने 
सांझ-सवेरे 
कब तक कलरव 
बिन वन-उपवन 
जीवन उचटा - उचटा 
कब तक 
आखिर यह सन्नाटा 
कब तक ?!

Thursday, April 30, 2020

सुनो सुनती हो न सोनां



तुम्हे तज कर तुम्हारे योग्य भी
अब तो नहीं हम
पर अब यह भिक्ष अंतिम
मांगने फिर से पलट आये
हो संभव यदि तुम्हारे
करुण अंत: से
तो देवी
हमें दो दान
अपने हृदय के
अंतिम कुसुम का।

Tuesday, March 24, 2020

I shall reach thee!

I ran 
I fell
I walked
I was cut
I crawled
I was bruised
I left my body
I became a hue
But I never stopped 
moving
towards you!

Monday, February 24, 2020

Life अगड़म बगड़म

कहाँ क्या हो रहा है, कहाँ किस का सिरा है, 
कुछ समझ नहीं आता, सब जहान सिरफिरा है 




Friday, February 14, 2020

Life and love in most unlikely places


ट्रक का दार्शनिक कहता है -

मेरा सो जावे नहीं
जावे सो मेरा नहीं। 

और मेरा दार्शनिक कहता है,
उसका क्या
जो मेरा था
और चला भी गया
और तब भी
मेरा ही रहा।
रहा ना ? 

Sunday, February 9, 2020

बीत गया सब कुछ


कितनी सुबहें बीतीं हैं
उस बालकनी में
कितनी यादें उस गलियारे
से निकली हैं
कितने लम्हे इसी सड़क पर
बुने गए थे
कितने शख्स गए आये
और बीत गए हैं

जिस दर पर थे 
पाँच बरस के किस्से बाँचे 
उनको गुज़रे भी अब 
शायद बरस अट्ठारह बीत गए हैं।  

Tuesday, February 4, 2020

वसन्त बड़ा निर्मम समय है


वसन्त बड़ा निर्मम समय है।
इस समय में सब कुछ है 
और कुछ भी नहीं।  
ऐसा कब होगा जब 
इस सूर्यमुखी से खिले हुए 
तुम भी हो यहाँ ?
तुम्हारे बिना 

वसन्त बड़ा निर्मम समय है।

Friday, January 31, 2020

तुम तक



बारिश में धुली एक सड़क की तरह
मैं अक्सर तुम पर से गुज़र जाना चाहता हूँ।  
ऐसा हमेशा होता तो नहीं
शायद हमेशा याद भी नहीं रहती ऐसे।  
लेकिन हसरत का हमेशा होना अगर कुछ मायने रखता है
तो मैं हमेशा तुम्हारे सफ़र में हूँ।