Thursday, February 13, 2014

वसन्त - 9

इतने सारे पत्तों, दलदल, और परीक्षाओं के बीच भी कमल ऐसा निर्मल रहा 
कि दैवी उपासना में अपना स्थान बना पाया. 
कहाँ बच पाते हैं हम सब ऐसे कल्मष से! 
Lotus

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